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केदारनाथ अग्रवाल के प्रमुख काव्य-संकलन II केदारनाथ अग्रवाल की प्रमुख रचनाएँ II केदारनाथ अग्रवाल की रचना II केदारनाथ अग्रवाल रचना संचयन

  केदारनाथ अग्रवाल के प्रमुख काव्य-संकलन II केदारनाथ अग्रवाल की प्रमुख रचनाएँ II केदारनाथ अग्रवाल की रचना II केदारनाथ अग्रवाल रचना संचयन II kedarnath agrawal ki kritiyan  केदारनाथ अग्रवाल जी की काव्य कृतियाँ अधोलिखित हैं :-     1.             युग की गंगा - 1947       2.             लोक और आलोक - 1957       3.             आग का आईना - 1970       4.             गुलमेंहदी - 1978       5.             बम्बई का रक्त - स्नान - 1981       6.             मार प्यार की थापे - 1981       7.  ...

हिन्दी साहित्य के प्रमुख नाटककार और साथ में उनके जन्म तिधि भी

हिन्दी के नाटककार   हेलो दोस्तों आप सभी को मेरा नमस्कार और आपको इस पोस्ट में हिन्दी भाषा साहित्य  के प्रमुख नाटककार के विषय में एक जानकारी दी गई है, आपकी परीक्षाओं में उपयोगी साबित होगी. इस पोस्ट  अपने दोस्त यार को जरूर share कीजिए और कमेन्ट भी कीजिए........ 1.       उपेन्द्रनाथ अश्क – 1910-1996   2.       जगदीशचन्द्र गुप्त – 1917-1987   3.       धर्मवीर भारती – 1926-   4.       विपिन कुमार अग्रवाल – 1919-1990   5.       विष्णु प्रभाकर - 1912   6.       मोहन राकेश – 1925-1972   7.       लक्ष्मीनारायण लाल – 1925-1987   8.       सुरेन्द्र वर्मा - 1941   9.       गिरिराज किशोर - 1925   10.   भीष्म साहनी - 1925   11.   मुद्रारासक्ष – 1933 ...

मौलिक चिन्तन के लेखक पंडित बालकृष्ण भट्ट

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हिन्दी भाषा साहित्य के मौलिक चिन्तन के लेखक पंडित बालकृष्ण भट्ट पंडित बालकृष्ण भट्ट सर्जनात्मक लेखन से राष्ट्रव्यापी सोच को प्रमुखता देने वाले पं. बालकृष्ण भट्ट की जन्मतिथि पर वेशेष : आधुनिक हिन्दी गद्द साहित्य के निर्माण और विकास में भरतेंदु युग के साहित्यकार पंडित बालकृष्ण भट्ट का नाम उल्लेखनीय है. ‘हिन्दी प्रदीप’ मासिक पत्रिका के माध्यम से वह करीब 32 वर्ष तक हिन्दी साहित्य की सेवा करते रहें.   3 जून 1844 क प्रयाग में जन्मे बाल कृष्ण भट्ट प्रखर निबन्धकार और नाटककार थे. प्रयाग के कायस्थ पाठशाला में वह संस्कृत के अध्यापक रहे. हास्य व्यंग प्रियता, सहज भाव अभिव्यक्ति और सक्षम भाषा के कारण हिन्दी गद्द साहित्य में अपना श्रेष्ठ स्थान रखने वाले बालकृष्ण भट्ट ने लेखन की सभी शैलियों से साहित्य को समृद्ध किया.   ‘हिन्दी साहित्य के इतिहास’ में बालकृष्ण भट्ट के बारे में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल लिखते हैं कि ‘समय के प्रतिकूल मूल विचारों को उखाड़ने और परिस्थिति के अनुकूल नए विचारों को जमाने में उनकी लेखनी सदा तत्पर रहती थी.’ आचार्य शक्ल के अनुसार पंडित बाल कृष्ण भट्ट ने ह...