हिन्दी निबन्ध hindi nibandh II hindi essay II हिंदी साहित्य के निबंधकार II हिंदी निबंध साहित्य का क्रमिक विकास लिखिए निबन्ध अपने-आपमें पूर्ण एक सर्जनात्मक विधा है. लेख और समीक्षा से निबन्ध इस माने में भिन्न होते हैं कि लेख मेंकिसी भी ज्ञान-विज्ञान के विषय का प्रतिपादन होता है और समीक्षा में किसी कृति, कृतिकार अथवा साहित्य सिद्धांत का सामालोचनात्मक विश्लेषण होता है, पर निबन्ध में किसी भी विषय पर रचनाकार की संवेदना आत्मीय ढंग से अभिव्यक्त होती है. निबन्ध में रचनाकार की भाव छवि और उसके व्यक्तिक संसपर्श का बड़ा महत्व होता है. वह अपने पाठकों से मानो वार्तालाप सा करता होता है. इस अर्थ में निबन्ध एक साहित्यिक विधा के रूप में अपने व्युत्पत्तिमूलक अर्थ में बंधा हुआ या सुगंठित से भिन्न बन्धनहीन या उन्मुक्त का अर्थद्दोतन करता है. निबन्धकार के लिए न तो विषय का बन्धन होता है और न ही उसके विचार-प्रवाह का वह धूलिकण से लेकर चाँद सितारों तक को अपना विषय चुन सकता है. उसके विचार – प्रवाह की गति भी निरंकुश होती है. वह अपने भावधारा में बहता हुआ कितने ही विषयों के कूल-किनारों का स्पर्श कर सकता है पर ...
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