हिन्दी की सूफी प्रेमाख्यान काव्य परंपरा II UGC NET II बहुत महत्वपूर्ण जानकारी केवल आप सभी के लिए
हिन्दी की सूफी प्रेमाख्यान काव्य परंपरा डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त ने अपनी इतिहास कृति ‘हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’ में देखा जाता है. उन्होंने इस परंपरा के अंतर्गत सूफी एवं गैर सूफी रूपों से जुड़ी कृतियों को एक मानकर उसे ‘रोमंसिक कथा काव्य परंपरा’ का नाम दिया है. उन्होंने इस नामकरण को केन्द्र में रखते हुए टिप्पणी दी है – ‘प्रस्तुत काव्य परंपरा को अब तक विभिन्न नामों से पुकारा जाता रहा है. यथा – प्रेमार्गी (सूफी शाखा, प्रेमकाव्य, प्रेम गाथा, प्रेम कथानक काव्य, प्रेम काव्य,प्रेमाख्यान आदि’) यह आश्चर्य की बात है कि हिन्दी के विभिन्न विद्वानों ने इस विभिन्न नामों का प्रयोग करते हुए समय इनके कार्य का स्पष्टीकरण करने का प्रयास नहीं किया है’. उन्होंने रोमांसिक कथा काव्य की दो श्रेणियाँ की है : a. पूर्वमध्यकाल की रचनाएँ b. उत्तर मध्यकाल की रचनाएँ a. पूर्व मध्यकाल के अंतर्गत डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त ने निम्नलिखित काव्यों को रखा है :- 1. ...