हिन्दी लेखिका नासिर शर्मा II होती रहेगी नवीन रचना II एक संक्षिप्त महत्वपूर्ण बातचीत.....



होती रहेगी नवीन रचना  

कोरोना संक्रमण के इस दौर में रचनात्मक के साथ साहित्यकार किस तरह अपने समय का उपयोग कर रहे हैं, जानते हैं उन्हीं से .......
 हिन्दी लेखिका नासिर शर्मा II होती रहेगी नवीन रचना II एक संक्षिप्त महत्वपूर्ण बातचीत, hindi writer nasira sharma
हिन्दी लेखिका नासिरा शर्मा 


नई रचनात्मक लाइन पर निकल पड़ी हूँ.

नासिरा शर्मा, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका है.

सही पूछे तो मैंने लॉकडाउन का एक तरह से आनन्द उठाया. शुरूआती खबरों और हालात से थोड़ी अवसादग्रस्त जरूर हुई, लेकिन बाद में चीजों को समझना, बदलाव को देखा तो उसी में ढलने लगी. इस दौरान काफी कुछ नया करने का प्रयास किया है. कोई बड़ा उपन्यास उठा नहीं सकती थी तो इस बार अलग विधा में उठा नहीं सकती थी तो इस बार अलग विधा में हाथ आजमाया. इस दौरान बेहद सादे शब्दों में छोटी-छोटी कविताएँ लिखीं. एक यूट्यूब चैनल शुरू किया और उसपर अपनी रचनाओं को संजोने लगी. लोगों को मेरा यह तकनीकी प्रयोग बेहद पसंद आया और उन्होंने सराहना की. इस प्रक्रिया में काफी बेहतर महसूस करने लगी. मैंने एक उपन्यास लिखा था इन्सान और कुत्तों के रिश्तों पर. उसे भी पूरा करने में जुट गई हूँ. लॉकडाउन का फायदा ऐसे मिला कि इस काल को भी उप उपन्यास में स्थान दे रही हूँ जो चुजें बीच में छुट गई थीं. उन्होंने पूरा करने का बहुत वक्त मिला.

मुझे लगता है कि मेरी रचनाएँ और मेरी साहित्यिक पूंजी लोगों तक पहुँचे, इसके लिए उसे डिजिटल बना रही हूँ. मैं चाहती हूँ कि तकीनीकी दुनिया में भी मेरा साहित्य हो. इस दौर में मेरे अदंर का पत्रकार और मेरा लेखक बहुत बेचैन हुआ. मैंने कविताएँ कभी नहीं लिखी थी, उस दौर में लिखने लगी तो लोगों को भा गई. मैं लॉकडाउन में भी निकल पड़ती थी लोगों की परेशानियाँ जानने, उनसे बातचीत करने. विभिन्न स्थानों पर जाकर मैंने मुख्तलिफ़लोगों के साक्षात्कार भी किए. मैंने पाया कि इन तीन महीनों के समय में मैं एक नई रचनात्मक दिशा में निकल पड़ी.

कोरोना का यह काल हैरत में डालने वाला है. एक साथ पूरी दुनिया इस विपत्ति को झेल रही हैं. सीधी सी बात है कि प्रकृति हमसे नाराज है और वह बता रही है कि इन्सान अपनी हद में रहे वरना बदला लेना उसे बेहतर तरीके से आता है. हालाकि इस दौर में जहाँ सभी को एकजुटता दिखानी चाहिए. वहाँ लोग फ्रेम से बाहर होते जा रहे है. इस काल में भी इंन्सानियत निकलकर नहीं आ पा रही हैं. राजनीति हो रही है, लोग गैरजरूरी हरकतों से बाज नहीं आ रहें हैं. छोटी-छोटी चीजों को व्यवसाय और मुनाफे के अवसर के तौर पर देख रहें हैं.

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