नयी कविता के प्रमुख कवि एवं उनकी कृतियाँ II UGC NET EXAMS
नयी कविता के प्रमुख कवि एवं उनकी कृतियाँ
1. सच्चिदानन्द हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
क. भग्नदूतख. चिंताग. इत्यलम्घ. हरी घास पर क्षण भरङ. बाबरा अहेरीच. कितनी नावों में कितनी बारछ. क्योंकि मैं उसे जनता हूँज. सागर मुद्राझ. पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँञ. इन्द्र धनुष रौंदे हुए येट. अरी ओ करुणा प्रभामयठ. आँगन के पार द्वारड. महावृक्ष के नीचेढ. नदी की बाँक पर छाया
2. गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’
क. चाँद का मुँह टेढ़ा हैख. भरी-भरी खाक धूल
टिप्पणी :- मुक्तिबोध ने अंधेरे में, ब्रह्म राक्षस शीर्षक कविताओं में फैंटेसी शिल्प का सर्जनात्मक उपयोग किया है.
3. गिरिजा कुमार माथुर
क. मंजीरख. नाश और निर्माणग. साक्षी रहे वर्तमानघ. धूप के धानङ. भीतरी नदी यात्रा मेंच. शीला पंख चमकीलेछ. छाया मत छूनाज. पृथ्वी कल्प कल्पान्तर
4. भारत भूषण अग्रवाल
क. मुक्ति मार्गख. ओ प्रस्तुत मनग. अनुपस्थित लोगघ. कागज के फूलङ. उतना वह सूरज हैच. अग्निलिकछ. छवि के बन्धनज. जागते रहो
5. प्रभाकर माचवे
क. अनुक्षणख. स्वप्न भंगग. मेपल
6. कुँवर नारायण
क. चक्रव्यूहख. आत्मजयीग. परिवेश हम तुमघ. आमने सामनेङ. कोई दूसरा नहीं
7. केदार नाथ सिंह
क. जमीन पक रही हैख. अभी बिल्कुल अभीग. अकाल में सारसघ. यहाँ से देखोङ. बाघच. उत्तर कबीरछ. तालस्ताय और साईकिल
8. शमशेर बहादुर सिंह
क. चुका भी नहीं हूँख. इतने पास अपनेग. दोआबघ. कुछ कविताएँ, कुछ और कविताएँ
9. भवानी प्रसाद मिश्र
क. सतपुड़ा के जंगलख. गीत फरोशग. कमल के फूलघ. अनाम तुम जाते होङ. त्रिकाल संध्याच. परिवर्तन जिएछ. मानसरोवर दिनज. कालजयीझ. बुनी हुई रस्सीञ. खुशबू के शिलालेख
10. नरेश मेहता
क. वन पाखी सुनोख. बोलने दो चिड़कोग. मेरा समर्पित एकांतघ. पिछले दिनों नंगे पैरोंङ. उत्सवाच. प्रवादपर्वछ. महाप्रस्थानज. शर्बरीझ. अरण्याञ. संशय की एक रातट. आखिरी समुद्र से तात्पर्यठ. प्रार्थना पुरुष
11. रघुवीर सहाय
क. सीढियों पर धूम मेंख. हँसो हँसो जल्दी हँसोग. लोग भूल गये हैंघ. कुछ पत्ते कुछ चिट्ठियाँङ. आत्महत्या के विरुद्ध
12. धर्मवीर भारती
क. कनुप्रियाख. सात गीत वर्षग. ठंडा लोहाघ. देशान्तरङ. अंधायुग (काव्य नाटक)
13. विजयदेव नारायण शाही
क. साखीख. मछली घरग. संवाद तुमसे
14. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
क. काठ की घंटियाख. बांस का पुलग. एक सूनी नावघ. गर्म हवाएँङ. कुआनोनदीच. जंगल का दर्दछ. खूटियों पर टंगे लोग
15. हरिनारायण व्यास
क. त्रिकोण पर सूरजख. मृग और तृष्णा
16. श्री राम वर्मा
क. कालपात्रख. शब्दों की शताब्दी
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